क्यों डरता हूँ मैं तुम्हे खोने से,
जबकि तुम्हे मैंने पाया ही कहाँ है?
तुम क्या जानो विरह की पीड़ा,
तुमने अभी मुझे खोया ही कहाँ है?
जबकि तुम्हे मैंने पाया ही कहाँ है?
तुम क्या जानो विरह की पीड़ा,
तुमने अभी मुझे खोया ही कहाँ है?
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-118