'अजनबी' जब लगने लगे अपना सा,
अपरिचित हो जाए चिरपरिचित सा,
अन्जाना हो जाए जाना पहचाना सा,
यहीं से प्रारम्भ एक प्रेम-फ़साना सा।
अपरिचित हो जाए चिरपरिचित सा,
अन्जाना हो जाए जाना पहचाना सा,
यहीं से प्रारम्भ एक प्रेम-फ़साना सा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-113
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