यह किसके स्वर मुझ तलक पहुँच रहे हैं,
चुपके से मेरे ह्रदय पटल पर उतर रहे हैं,
अरे नहीं! भला वो क्यों पुकारेगी मुझको,
कल्पनाओं में, ये तो मेरे कान बज रहे हैं।
चुपके से मेरे ह्रदय पटल पर उतर रहे हैं,
अरे नहीं! भला वो क्यों पुकारेगी मुझको,
कल्पनाओं में, ये तो मेरे कान बज रहे हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-112
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