24.5.24

M-111 सीमाओं ने मुझको भ्रमित

सीमाओं ने मुझको भ्रमित कर दिया,
परिभाषाओं में ही सीमित कर दिया,
मै उड़ान भर चुका था आकाश की ओर,
पर किसी ने पंखों को सीमित कर दिया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-111

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...