सीमाओं ने मुझको भ्रमित कर दिया,
परिभाषाओं में ही सीमित कर दिया,
मै उड़ान भर चुका था आकाश की ओर,
पर किसी ने पंखों को सीमित कर दिया।
परिभाषाओं में ही सीमित कर दिया,
मै उड़ान भर चुका था आकाश की ओर,
पर किसी ने पंखों को सीमित कर दिया।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-111
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