24.5.24

M-110 न भविष्य हूँ मै,

न भविष्य हूँ मै, ना हूँ मै वर्तमान तुम्हारा,
जाने क्यूं फिर भी रहता है ध्यान तुम्हारा,
सभी हसरतें निकल गईँ दिल से अब,
निकलता नहीं तो बस अरमान तुम्हारा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-110

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