न भविष्य हूँ मै, ना हूँ मै वर्तमान तुम्हारा,
जाने क्यूं फिर भी रहता है ध्यान तुम्हारा,
सभी हसरतें निकल गईँ दिल से अब,
निकलता नहीं तो बस अरमान तुम्हारा।
जाने क्यूं फिर भी रहता है ध्यान तुम्हारा,
सभी हसरतें निकल गईँ दिल से अब,
निकलता नहीं तो बस अरमान तुम्हारा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-110
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