हकीकत में, जो न कभी मिलते हैं,
मुहब्बत में जो न कभी पिंघलते हैं,
सपनों में वो लग जाते हैं सीने से,
इसीलिए ख़्वाबों को मन मचलते हैं।
मुहब्बत में जो न कभी पिंघलते हैं,
सपनों में वो लग जाते हैं सीने से,
इसीलिए ख़्वाबों को मन मचलते हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-195
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