सदियाँ बीत गईं, तुझे मगर भूला नहीं हूँ मै,
वो बातें, समां, हसीं मंज़र, भूला नहीं हूँ मै,
अपनी ज़िद में तूने किनारा कर लिया मुझसे,
पर तेरा वो जोशे-ए-मुहब्बत भूला नहीं हूँ मै।
वो बातें, समां, हसीं मंज़र, भूला नहीं हूँ मै,
अपनी ज़िद में तूने किनारा कर लिया मुझसे,
पर तेरा वो जोशे-ए-मुहब्बत भूला नहीं हूँ मै।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-194
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