बात-बात में बातें बहुत कर लीं ज़माने की,
अब ज़रा कुछ बातें अपनी भी तो कर लूं।
मुंह फेर कर खड़ा रहूंगा कब तलक मैं,
रुख आईने की तरफ़ ज़रा मैं भी तो कर लूं।
अब ज़रा कुछ बातें अपनी भी तो कर लूं।
मुंह फेर कर खड़ा रहूंगा कब तलक मैं,
रुख आईने की तरफ़ ज़रा मैं भी तो कर लूं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-102
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