काल्पनिकताएं आज वास्तविकताएं बन गईं हैं
और वास्तविकताएँ काल्पनिकताएं बन गईं हैं।
परिवर्तनों को देखके हम बहुत दुविधाओं में हैं,
निर्लज्जताएं भी कैसे आधुनिकताएं बन गईं हैं।
और वास्तविकताएँ काल्पनिकताएं बन गईं हैं।
परिवर्तनों को देखके हम बहुत दुविधाओं में हैं,
निर्लज्जताएं भी कैसे आधुनिकताएं बन गईं हैं।
-वीरेन्द्र सिन्हा "अजनबी"-101
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