इतनी मुफ्त सलाह-मशविरे रोज़ मुझे मिल जाते हैं,
सोचता हूँ जहाँ में इंसानियत भाईचारा अभी बाकी है।
हर दिन सुबह-सुबह सोचकर फिक्र में मै पड़ जाता हूँ,
सारी दुनियां सुधर चुकी, बस मेरा ही सुधरना बाकी है।
सोचता हूँ जहाँ में इंसानियत भाईचारा अभी बाकी है।
हर दिन सुबह-सुबह सोचकर फिक्र में मै पड़ जाता हूँ,
सारी दुनियां सुधर चुकी, बस मेरा ही सुधरना बाकी है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-100
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