23.5.24

Q- शायद फिर बहार

शायद फिर बहार शहर में आने लगी है,
फिर उनकी महक घर में आने लगी है,
जबसे सुन ली है उनके आने की आहट,
फिर एक ग़ज़ल ज़हन में आने लगी है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-172

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