26.5.24

Q-055 आज जो मुझे

आज जो मुझे मुस्कुराते देख लिया,
बस इसी बात से नाराज़ है ज़िन्दगी।
कितनी ख्वाहिशों को मैंने दबा दिया,
पर फिर भी मुझसे नाराज़ है ज़िन्दगी।   

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-055

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