आज जो मुझे मुस्कुराते देख लिया,
बस इसी बात से नाराज़ है ज़िन्दगी।
कितनी ख्वाहिशों को मैंने दबा दिया,
पर फिर भी मुझसे नाराज़ है ज़िन्दगी।
बस इसी बात से नाराज़ है ज़िन्दगी।
कितनी ख्वाहिशों को मैंने दबा दिया,
पर फिर भी मुझसे नाराज़ है ज़िन्दगी।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-055
No comments:
Post a Comment