23.5.24

Q-187 ना घटने के डर

ना घटने का डर, ना लुटने का डर,
न ज़रूरत वारिस की न तालों की।
नींद आती है, सकून की हर रोज़,
यही है दौलत बिन दौलत वालों की।

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-187

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