24.5.24

Q-199 पुराने ज़ख़्म अब बे-असर

पुराने ज़ख्म अब बे-असर हो गए हैं,
हम भी अब इनके ख़ूगर  हो गए हैं,
हम न करेंगे अब इनकी कोई दवा,
अब तो ये हमारे हमसफ़र हो गए हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-199

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...