बैठे रहते थे बज़्म में लोग, जिनके बहाने से,
बेनूर होगई महफिलें, अब उनके न आने से,
कोई तो मना लाए उन्हें, उजड़ी महफ़िल में,
हमने देखी नहीं रौनक यहाँ, एक ज़माने से।
बेनूर होगई महफिलें, अब उनके न आने से,
कोई तो मना लाए उन्हें, उजड़ी महफ़िल में,
हमने देखी नहीं रौनक यहाँ, एक ज़माने से।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-198
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