मिल गया पैग़ाम उसका, जो उसने मुझे भेजा भी नहीं,
पढ़ लिया मैंने वो सभी, जो उसने मुझे लिखा भी नहीं,
कौन सा है यह सिलसिला, मेरे और उसके दरमियान,
कभी किसी ने जो सुना नहीं, किसी ने देखा भी नहीं।
पढ़ लिया मैंने वो सभी, जो उसने मुझे लिखा भी नहीं,
कौन सा है यह सिलसिला, मेरे और उसके दरमियान,
कभी किसी ने जो सुना नहीं, किसी ने देखा भी नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-192
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