24.5.24

M-116 काश, ये सीमाएं

काश, ये सीमाएं न हुआ करतीं,
न मै बंधता, न तुम बंधा करतीं,
राहों में आये किसी मोड़ पर भी,
न मै मुड़ता, न तुम मुड़ा करतीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-116

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