24.5.24

M-115 अश्रुओं को तुम न रोको

अश्रुओं को तुम ना रोको,
ये ग़मों की निशानियाँ हैं।
इन्हें बहने देना ही अच्छा,
ये बीत चुकी कहानियां हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-115

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