ख़ामोशी ख़ामोशी है पर बहरी नहीं है,
रात बहुत अंधेरी है, पर ठहरी नहीं है,
तुम्हारी ज़रा सी मुहब्बत ही बहुत है,
ग़म नहीं है मुझे वो अगर गहरी नहीं है।
रात बहुत अंधेरी है, पर ठहरी नहीं है,
तुम्हारी ज़रा सी मुहब्बत ही बहुत है,
ग़म नहीं है मुझे वो अगर गहरी नहीं है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-174
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