23.5.24

Q-174 ख़ामोशी खामोशी

ख़ामोशी ख़ामोशी है पर बहरी नहीं है,
रात बहुत अंधेरी है,  पर ठहरी नहीं है,
तुम्हारी ज़रा सी मुहब्बत ही बहुत है,
ग़म नहीं है मुझे वो अगर गहरी नहीं है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-174

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