अपने दर्द ज़माने से छुपाकर, मै घूमता रहा,
ग़म भुलाने की माकूल सी जगह ढूंढता रहा,
दीखती रही ख़ुशी मेरे जिस चेहरे पर तुम्हे,
वो था मुखौटा, जिसे ओढ़कर मै घूमता रहा।
ग़म भुलाने की माकूल सी जगह ढूंढता रहा,
दीखती रही ख़ुशी मेरे जिस चेहरे पर तुम्हे,
वो था मुखौटा, जिसे ओढ़कर मै घूमता रहा।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-200
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