24.5.24

M-105 माना अधिक ज्वलंत

माना अधिक ज्वलंत है तेरी तृष्णा,
पर इतनी अधीर न हो, नव-यौवना,
धरती की प्यास न बुझी, न बुझेगी,
बेचारा सावन बरस ले चाहे जितना।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-105

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