छोड़ो भी तस्करा-ऐ-बेवफ़ाई, बहुत हो गया,
ख़ामोश हो चुका वो इतना, कि बुत हो गया,
रौशन कर दी थी जिसने ज़िन्दगी किसी की,
ख़ुद उसी की ज़िन्दगी में अँधेरा गुप हो गया।
ख़ामोश हो चुका वो इतना, कि बुत हो गया,
रौशन कर दी थी जिसने ज़िन्दगी किसी की,
ख़ुद उसी की ज़िन्दगी में अँधेरा गुप हो गया।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-183
No comments:
Post a Comment