ज़ुबान की हिफ़ाज़त करता हूँ, कहीं फिसल न जाय,
दिल काबू में रखता हूँ, हाथ से कहीं निकल न जाय,
ख़ुदा की बक्षी हुई बड़ी नेमत है ज़िन्दगी "अजनबी",
डरता हूँ मकसद इसका ख़ाक में कहीं मिल न जाय।
दिल काबू में रखता हूँ, हाथ से कहीं निकल न जाय,
ख़ुदा की बक्षी हुई बड़ी नेमत है ज़िन्दगी "अजनबी",
डरता हूँ मकसद इसका ख़ाक में कहीं मिल न जाय।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-178
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