ज़िन्दगी कहाँ ले जायगी, हमें मालूम नहीं,
अँधेरे छटेंगे कि बढ़ेंगे, यह भी इलम नहीं,
हम तो चल पड़ें हैं ज़िन्दगी के पीछे-पीछे,
हमे फ़र्क नहीं गर सुबह नहीं या शाम नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-190
अँधेरे छटेंगे कि बढ़ेंगे, यह भी इलम नहीं,
हम तो चल पड़ें हैं ज़िन्दगी के पीछे-पीछे,
हमे फ़र्क नहीं गर सुबह नहीं या शाम नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-190
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