मेरी सुबाह है तुझसे, मेरी रात तुझसे,
तुझे कैसे खो दूं मैं, मेरी हयात तुझसे,
तुझे कैसे भुलाऊँ, मेरे ख़्वाब तुझसे,
तू ही मेरा साज़, इसमें आवाज़ तुझसे।
तुझे कैसे खो दूं मैं, मेरी हयात तुझसे,
तुझे कैसे भुलाऊँ, मेरे ख़्वाब तुझसे,
तू ही मेरा साज़, इसमें आवाज़ तुझसे।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-181
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