शिकवा करके भी क्या हासिल, कुछ बदलने वाला नहीं,
ज़ाहिर है लिखने वाला भी अब कुछ सुनने वाला नहीं।
ज़ाहिर है लिखने वाला भी अब कुछ सुनने वाला नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-136
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
बेचारा दिल बस धड़कता है, बेज़ुबाँ कभी बोलता नहीं।
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...