25.5.22

S-136 शिकवा करके भी

शिकवा करके भी क्या हासिल, कुछ बदलने वाला नहीं,
ज़ाहिर है लिखने वाला भी अब कुछ सुनने वाला नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-136

24.5.22

P-096 सबसे कड़ी

सबसे कड़ी सख़्त सज़ा वो है 
जो किसी बेगुनाह को दी जाए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-096

T-019 नाराज़ होकर

नाराज़ होकर दूर न जाना, ज़िन्दगी,
कोई तुझे छीन न ले मुझसे ज़िन्दगी,
यहीं रहना मेरे आसपास ऐ ज़िन्दगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-019




T-018 कोई नहीं बन

कोई नहीं बन सकता शायर,
ओढ़ कर गुलज़ार की चादर,
ख़ुदा की बड़ी न्यामत चाहिए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  T-018

23.5.22

M-032 दुनियाँ में जब

दुनियां मे जब ऐतबार ही रहा नहीं,
फिर प्यार भी कहाँ से रह पाएगा?
जब ख़ुदा भी बन गया हो बहरा, 
तो इंसाँ किससे बात कह पाएगा?

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-032

P-095 बेवफ़ाओं को भला

बेवफ़ाओं को भला क्यों है दवाए-दर्द की तलाश,
उनको कभी दर्द में तड़पते हुए देखा है किसी ने?

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-095

P-094 ग़रीबी पर रहम

ग़रीबी पर रहम खाना है तो हर ग़रीब पर खाओ,
भगवान ग़रीबी किसी जाति विशेष को ही नहीं देता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-094

P-093 आदमी कभी-कभी

आदमी कभी-कभी बहुत थक जाता है,
बुरा रहकर ही नहीं,अच्छा रहकर भी !

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-093

Q-066 मौसम बदल जाने

मौसम बदल जाने से मंज़र बदल जाते हैं, हालात नहीं बदल जाते। 
रंग बदलने से हक़ीक़तों पे पर्दे पड़ जाते हैं, मकुद्दर नहीं बदल जाते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-066

22.5.22

P-092 ज़ुबाँ ख़ामोश

ज़ुबाँ ख़ामोश है पर यादें बोल रहीं हैं,
भरी तन्हाईयों में तुझे ही टटोल रहीं हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-092

21.5.22

Q-065 मत देखा कर

मत देखा कर इस क़दर ख़्वाब,
आंखें तेरी ख़राब हो जाएंगी।
आंखों से पानी बह निकलेगा,  
हक़ीक़तेँ भी वो देख ना पाएंगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q- 065

P-091 बहुत महसूस

बहुत महसूस होता है वो दर्द भी उसका,
चाह कर भी जिसको मैं बांट नहीं सकता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-091

20.5.22

S-135 ख़ुद ही पहुंचाई

खुद ही पहुंचाई है तकलीफ़ हमने दिल को,
क्यों देखा किसी को इतने करीब से।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-135

P-090 कितने अजीब,

कितने अजीब, कितने भोले लोग वो होते हैं,
दिल की किताब अनपढ़ों के हाथ मे जो सौंप देते हैं.

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-090

S-134 कहाँ जाओगे

कहाँ जाओगे हमे अकेला छोड़के,
इस ज़माने में बेवफ़ा कम तो नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-134

19.5.22

P-089 इतना न खाओ

इतना न खाओ कि पचना मुश्किल हो जाए,
इतना भी न चढ़ो कि उतरना मुश्किल हो जाए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-089

18.5.22

P-088 लोग मेरे ज़ब्त को

लोग मेरे ज़ब्त को, ज़ब्त नहीं मानते,
कहते हैं पत्थर मुझे, इंसाँ नहीं मानते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-088

17.5.22

Q-064 ये न समझ लेना

ये न समझ लेना कि मैं तन्हा बैठा हूँ,
मेरा साया भी है साथ, मैं जहां बैठा हूँ
अभी तक ख़ुद से नही हुआ हूँ जुदा,
हालांकि अपनी दुनियाँ गवां बैठा हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-064

S-133 ये न समझना

ये न समझना मैं तन्हा बैठा हूँ,
जहां है मेरा साया मैं वहां बैठा हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S133

S-132 वो ज़ख़्म दिखाता

ज़ख़्म कभी दिखाता नहीं, ज़ुबाँ भी यह खोलता नहीं,

बेचारा दिल बस धड़कता है, बेज़ुबाँ कभी बोलता नहीं।


-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-132

15.5.22

S-131 चंद खुशियां क्या

चंद खुशियां क्या मिलीं, दर्द भरी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं,
बक़ौल 'गुलज़ार' के, हम मुस्कुराने के क़र्ज़ उतार रहे हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-131

S-130 कई मसले

कई मसले ज़िन्दगी के हल हो गए होते,
ज़िद की जगह अगर हाथ पकड़े रहे होते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-130

14.5.22

M-031 क्या चीज़ थी

क्या चीज़ थी वो तंगदस्ती भी,
पा नहीं सकती आज बड़ी हस्ती भी।
छोटी बातें, अचानक मुलाकातें,
महलों जैसी थी वो तंग बस्ती भी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-031

13.5.22

S-129 परेशाँ क्यों हो,

परेशां क्यों हो, हर ग़म मुझे देदो,
मेरे ग़मकदे में कुशादगी बहुत है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-129

P-087 नेक बंदे को हर सिम्त

नेक बन्दे को हर सिम्त ऊपर वाला नज़र आता है,
मंदिर में मस्जिद, मस्जिद में मंदिर नज़र आता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-087

P-086 रिश्ते भला आप

रिश्ते भला आप कैसे निभाओगे,
अपनों को जब चौखट पे बिठाओगे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-086

M-030 बीमार हो 'बीमार'

बीमार हो 'बीमार' का हाल पूछते हो,
ख़ुद बेहाल हो,  मेरा हाल पूछते हो,
तुमसे दूर रह कर हम कैसे हैं,
भला तुम ये कैसा सवाल पूछते हो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-030

S-128 उसका ख़्याल

उसका ख़्याल और भी पुख़्ता होता जाएगा,
पैमाने में साक़ी जितनी शराब डालता जाएगा।

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-128

12.5.22

P-085 अपनी आंखों से

अपनी आंखों से भले ही दूर कर,
अपनी ख़ुशबू से मगर दूर न कर।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-085

S-127 मेरी धड़कनें

मेरी धड़कनें और सांसें भी हो गई हैं ख़ामोश,
सिर्फ़ एक तुम ही नहीं जो ख़ामोश हो गए हो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-127

11.5.22

P-084 ज़ख़्मे-इश्क़ ठीक

जख़्मे-इश्क़ ठीक करने की कीजे जल्दी नहीं,
के इसका इलाज सिर्फ़ वक्त है, दूध-हल्दी नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी P-084

10.5.22

M-029 बहुत मुद्दतों बाद

बहुत मुद्दतों  बाद ये एक शाम आई है,
पासबाने-सब्रो-शऊर अब न रोक मुझे।
बड़ी मुश्किल से ज़ुबाँ पर वो बात आई है,
कह लेने दे आज मुझे, अब न टोक मुझे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-029

S-126 इश्क़ में सिर्फ़ उतनी ही

इश्क़ में सिर्फ़ उतनी ही गुज़री है ज़िन्दगी अच्छी,
जितनी कि ग़लत फ़हमियों में गुज़ार दी हमने।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-126

9.5.22

Q-063 कौन करवाएगा चुप

कौन करवाएगा चुप, अब मुझको,
मैंने तो ख़ुद को ही ख़ुद रुलाया है।
तुमने दे दिए, तो तुम ही मिटाओगे,
ज़ख्मों को आसरा, अब तुम्हारा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-063

S-125 कितनी मिलावट

कितनी मिलावट होने लगी है आज तिजारत-ऐ-इश्क़ में,
ऊपर-ऊपर मोहब्बतें, अंदर नफ़रतें ही नफ़रतें भरी पड़ी हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-125

Q-062 उसकी नफरतों का

उसकी नफरतों का गिला क्या कीजे,
मुहब्बतों से जिसका वास्ता रहा नहीं,
खामोशियाँ ही बेहतर हैं अब उसकी,
उसकी ज़ुबान का  भरोसा रहा नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-062

7.5.22

P-083 बेवफाई भी

बेवफ़ाई भी अपनी एहमियत रखती है,
वफ़ा का मयार जो ऊंचा ये कर देती है ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-083

Q-061 बुतों की आंखें

बुतों की आंखें पत्थर की होती हैं,
वो ख़ुद से कभी नम नहीं होतीं हैं,
कितने ही जज़्बात उंडेल दो उनमें,
फिर भी वो कभी नम नहीं होती हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-061

6.5.22

Q-060 हाँ, मेरा दिल

हाँ, मेरा दिल पत्थर का है,
जल्दी से यह टूटता नहीं।
एक बारी गर टूट भी गया,
तो जल्दी से ये जुड़ता नहीं। 

-वीरेंद्र सिन्हा ,"अजनबी" Q-060

S-124 मेरी होकर भी

मेरी होकर भी मुझे मिलने का मौका नहीं दिया उसने,
मेरे देखते-देखते मेरे सामने से गुज़र गई मेरी ज़िन्दगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-124

S-123 बहुत संभाल कर

बहुत संभाल कर रखते हम उसको अपने लिए,
गर मालूम होता जिंदगी इतनी उदास भी होगी कभी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-123

P-082 जब कोई होता है

जब कोई होता है,  तो कदर नहीं होती,
नहीं रहता तो उस बिन गुज़र नहीं होती।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-082

P-081 मैं जब भी कोई

मैं जब भी कोई पत्ता सूखकर गिरता देखता हूँ,
अपने उजड़े हुए चमन को बहुत याद करता हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-081

5.5.22

Q-059 कभी ज़िन्दगी

कभी ज़िन्दगी ज़िन्दगी तो रहती है,
पर जाने क्यों वो बेदम हो जाती है।
ये दुनियाँ तो दुनियाँ रहती है, मगर,
दुनियां लोगों की ख़त्म हो जाती है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-059

4.5.22

S-122 ज़माने की तेज

ज़माने की तेज़ हवाओं, तुम पर तोहमत न आने दूंगा मैं,
कह दूंगा मैं थका चराग़ था बुझ गया तुम्हारे आने से पहले।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-122

S-121 न ज़रा सी ज़मीं

न ज़रा सी ज़मीं मिली, न ज़रा सा आसमां मिला,
मुकम्मल जहाँ की जुस्तजू में हमे कुछ भी ना मिला।

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-121

S-120 ज़ुल्फ़ों को ये

ज़ुल्फ़ों को ये न्यामतें बड़े नसीब से मिलती हैं,
यूं हटाकर इन्हें रुख़सार से मेहरूम न कीजिये।  

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-120

M 118 मैं जो तुमको

मैं जो तुमको याद कर लेता हूँ,
उसे इश्क़ कतई न समझ लेना।
ये तो मेरे दिल का एक ऐब है
इसे मेरी मुहब्बत न समझ लेना। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-118

2.5.22

S-118 कितनी हसरतों

कितनी हसरतों से रोज़ देखता हूँ मैं तुझको,
कभी तो झूंट बोल दिया कर ऐ सच्चे आईने!

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-118

1.5.22

S-117 वो दिलकश

वो दिलकश मंज़र कितना हसीन होता,
गर होता असल, महज़ ख्वाब न रंगीन होता।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-117


S-116 बेइंतहा लंबा निकला

बेइंतहा लंबा निकला सफ़र मंज़िल का,
सफ़र ने ही छीन लिया मेरी मंज़िल को मुझसे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-116

S-115 कुछ दिन पहले

कुछ दिन पहले आया था एक दर्द मेरे दिल मे बसने को,
रास न आया मगर उसे मेरे दिल के ग़मक़दे में रहने को।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-115

M-028 जिसने अपने अंदर

जिसने अपने अंदर झांक लिया,
उसे ये दुनियां बुरी नहीं लगेगी।
जिसने दी हैं दुआएं दिल से सदा,
उसे किसी की बद्दुआ नहीं लगेगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-028

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...