ये न समझ लेना कि मैं तन्हा बैठा हूँ,
मेरा साया भी है साथ, मैं जहां बैठा हूँ
अभी तक ख़ुद से नही हुआ हूँ जुदा,
हालांकि अपनी दुनियाँ गवां बैठा हूँ।
मेरा साया भी है साथ, मैं जहां बैठा हूँ
अभी तक ख़ुद से नही हुआ हूँ जुदा,
हालांकि अपनी दुनियाँ गवां बैठा हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-064
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