18.5.22

P-088 लोग मेरे ज़ब्त को

लोग मेरे ज़ब्त को, ज़ब्त नहीं मानते,
कहते हैं पत्थर मुझे, इंसाँ नहीं मानते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-088

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K-007 सूरज को मैं

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