15.5.22

S-131 चंद खुशियां क्या

चंद खुशियां क्या मिलीं, दर्द भरी ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं,
बक़ौल 'गुलज़ार' के, हम मुस्कुराने के क़र्ज़ उतार रहे हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-131

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K-007 सूरज को मैं

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