कई मसले ज़िन्दगी के हल हो गए होते,
ज़िद की जगह अगर हाथ पकड़े रहे होते।
ज़िद की जगह अगर हाथ पकड़े रहे होते।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-130
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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