उसकी नफरतों का गिला क्या कीजे,
मुहब्बतों से जिसका वास्ता रहा नहीं,
खामोशियाँ ही बेहतर हैं अब उसकी,
उसकी ज़ुबान का भरोसा रहा नहीं।
मुहब्बतों से जिसका वास्ता रहा नहीं,
खामोशियाँ ही बेहतर हैं अब उसकी,
उसकी ज़ुबान का भरोसा रहा नहीं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-062
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