बेवफ़ाई भी अपनी एहमियत रखती है,
वफ़ा का मयार जो ऊंचा ये कर देती है ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-083
वफ़ा का मयार जो ऊंचा ये कर देती है ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-083
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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