बुतों की आंखें पत्थर की होती हैं,
वो ख़ुद से कभी नम नहीं होतीं हैं,
कितने ही जज़्बात उंडेल दो उनमें,
फिर भी वो कभी नम नहीं होती हैं।
वो ख़ुद से कभी नम नहीं होतीं हैं,
कितने ही जज़्बात उंडेल दो उनमें,
फिर भी वो कभी नम नहीं होती हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-061
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