2.5.22

S-118 कितनी हसरतों

कितनी हसरतों से रोज़ देखता हूँ मैं तुझको,
कभी तो झूंट बोल दिया कर ऐ सच्चे आईने!

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-118

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