मौसम बदल जाने से मंज़र बदल जाते हैं, हालात नहीं बदल जाते।
रंग बदलने से हक़ीक़तों पे पर्दे पड़ जाते हैं, मकुद्दर नहीं बदल जाते।
रंग बदलने से हक़ीक़तों पे पर्दे पड़ जाते हैं, मकुद्दर नहीं बदल जाते।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-066
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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