22.5.22

P-092 ज़ुबाँ ख़ामोश

ज़ुबाँ ख़ामोश है पर यादें बोल रहीं हैं,
भरी तन्हाईयों में तुझे ही टटोल रहीं हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-092

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