13.5.22

S-129 परेशाँ क्यों हो,

परेशां क्यों हो, हर ग़म मुझे देदो,
मेरे ग़मकदे में कुशादगी बहुत है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-129

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