6.5.22

P-081 मैं जब भी कोई

मैं जब भी कोई पत्ता सूखकर गिरता देखता हूँ,
अपने उजड़े हुए चमन को बहुत याद करता हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-081

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K-007 सूरज को मैं

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