कभी ज़िन्दगी ज़िन्दगी तो रहती है,
पर जाने क्यों वो बेदम हो जाती है।
ये दुनियाँ तो दुनियाँ रहती है, मगर,
दुनियां लोगों की ख़त्म हो जाती है।
पर जाने क्यों वो बेदम हो जाती है।
ये दुनियाँ तो दुनियाँ रहती है, मगर,
दुनियां लोगों की ख़त्म हो जाती है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-059
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