23.5.22

P-095 बेवफ़ाओं को भला

बेवफ़ाओं को भला क्यों है दवाए-दर्द की तलाश,
उनको कभी दर्द में तड़पते हुए देखा है किसी ने?

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-095

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...