बहुत मुद्दतों बाद ये एक शाम आई है,
पासबाने-सब्रो-शऊर अब न रोक मुझे।
बड़ी मुश्किल से ज़ुबाँ पर वो बात आई है,
कह लेने दे आज मुझे, अब न टोक मुझे।
पासबाने-सब्रो-शऊर अब न रोक मुझे।
बड़ी मुश्किल से ज़ुबाँ पर वो बात आई है,
कह लेने दे आज मुझे, अब न टोक मुझे।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-029
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