12.5.22

S-127 मेरी धड़कनें

मेरी धड़कनें और सांसें भी हो गई हैं ख़ामोश,
सिर्फ़ एक तुम ही नहीं जो ख़ामोश हो गए हो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-127

No comments:

Post a Comment

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...