4.5.22

S-120 ज़ुल्फ़ों को ये

ज़ुल्फ़ों को ये न्यामतें बड़े नसीब से मिलती हैं,
यूं हटाकर इन्हें रुख़सार से मेहरूम न कीजिये।  

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-120

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K-007 सूरज को मैं

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