4.5.22

S-121 न ज़रा सी ज़मीं

न ज़रा सी ज़मीं मिली, न ज़रा सा आसमां मिला,
मुकम्मल जहाँ की जुस्तजू में हमे कुछ भी ना मिला।

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-121

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