कुछ दिन पहले आया था एक दर्द मेरे दिल मे बसने को,
रास न आया मगर उसे मेरे दिल के ग़मक़दे में रहने को।
रास न आया मगर उसे मेरे दिल के ग़मक़दे में रहने को।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-115
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
No comments:
Post a Comment