24.5.22

T-018 कोई नहीं बन

कोई नहीं बन सकता शायर,
ओढ़ कर गुलज़ार की चादर,
ख़ुदा की बड़ी न्यामत चाहिए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  T-018

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