28.6.22

M-037 आपकी लम्बी ख़ामोशी

आपकी लम्बी ख़ामोशी में भी बड़ा दम है,
आपके ज़हन में ज़रूर कोई पेंच या ख़म है,
दिल में आपके मेरी फ़ाइल अब भी  है खुली,
इतना होना भी मेरे लिए भला क्या कम है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-037

26.6.22

S-156 हमने भलमनसाहत

हमने भलमनसाहत में जाने क्यों दर्द इतने पाल लिए,
कर सकते थे जिन्हें दरकिनार, उनके नखरे पाल लिए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-156

S-155 काश तुम मेरी

काश तुम मेरी दुनियाँ ना होते,वरना
मैं भी कह देता दुनियाँ जाए भाड़ में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-155

S-154 मैं बड़ा खुशनसीब हूँ

मैं बड़ा खुशनसीब हूँ, मेरे पास कितनी तन्हाई है,
वरना भीड़ से घिरे लोग तो ज़रा सी को तरसते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-154

24.6.22

P-122 विचारधारा

विचारधारा भी कैसे बदल जाती है मौसम की तराह।
बदल जाते हैं रंग-ढंग, बन जाता है सफ़ेद भी स्याह।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-122

S-152 आंख मीच लेने

आंख मीच लेने से दुनियाँ ख़त्म नहीं हो जाती है,
बस कुछ देर को दिखाई देनी बन्द सी हो जाती है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-152

23.6.22

P-121 एक शाम ने

एक शाम ने जबसे हमे बदनाम किया है,
तबसे ज़िन्दगी में अब कोई शाम होती नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-121

P-120 ऐ दोस्त ज़रा

ऐ दोस्त ज़रा दुरुस्त कर ले शऊर तेरा,
जाने कौन कब कहां तोड़ दे ग़रूर तेरा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-120

P-119 हादसे एक हद

हादसे एक हद तक ही सताते हैं,
उसके बाद तो वे आदत बन जाते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-119

P-118 देर से ही सही

देर से ही सही पर वो दिन ज़रूर आता है,
जब घमंड अच्छे-अच्छों का टूट जाता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-118

S-153 किस किस

किस किस को सबूत दूं अपने शीरीं होने का,
यहां तो खारे समंदर को भी मैं खारा लगता हूँ।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-153

P-117 एक जुनून में

इक जुनून में  इस कदर अदावतें बढ़ाते गए ,
इनके सिवा अब कुछ बचा नहीं ज़िन्दगी में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-117


22.6.22

P-116 दर्दो-ग़म में

दर्दो-ग़म में मुब्तला सभी हैं ज़माने में,
बस कुछ लोग हैं जो लगे हैं उन्हें बढ़ाने में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-116

21.6.22

S-151 कभी-कभार दर्द भी

कभी-कभार दर्द भी बड़ा बेवफ़ा हो जाता है,
होकर किसी का, किसी और का हो जाता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-151

20.6.22

Q-072 न हमारे निशां

न हमारे निशां रहे ना हमीं रहे,
न मकाँ रहे और ना मकीं रहे,
बदल गए सब ही के किरदार,
जो हमनशीं थे वे ना कहीं रहे।

 -वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-072

19.6.22

P-115 कभी कभी

कभी कभी ऐसा क्यों लगता है मुझे,
ख़ामोशियों में भी जैसे कोई बुलाता है मुझे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-115

S-150 चंद दिनों में

चंद दिनों में अपनी सी पर आगई अपनी ज़िन्दगी,
बड़ी मुकम्मल सी जो हमे लगने लगी थी ज़िन्दगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-150

P-114 अब तो बस वही

अब तो बस वही ख़ुश हैं,
जो ख़ुशियां छीन लेते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-114

S-149 बेख़ुद हुआ जाता

बेख़ुद हुआ जाता हूँ मैं इतना,
मुझे होश नहीं अपने ग़मों का भी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-149

S-148 कोई ग़मगीन उदास

कोई ग़मगीन उदास ख़ामोश बैठा है,
कौन जाने वो कितने ग़म पिए बैठा है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-148

S-147 तेरी बेरुखी ने

तेरी बेरूखी ने मेरा और तो कुछ बिगाड़ा नहीं,
फ़क़त शराफ़त पर से मेरा एतमाद उठा दिया।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-147

18.6.22

P-113 बुरे हालात में

बुरे हालात में इन्सान अच्छा बना रहता है,
और अच्छे हालात होते ही बुरा हो जाता है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-113


P-112 हालात भी

हालात भी हम पर कितना असर कर देते हैं,
अच्छे ख़ासे इंसाँन को बदल कर रख देते हैं।

वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-112

17.6.22

P-111 बस एक ख़्वाहिश

बस एक ख्वाहिश है,ऐसा झोंका आ जाए,
एक ही झटके में बोझ यादों का चला जाए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-111

S-146 एक के बाद एक

एक के बाद एक नए सिले मिल रहे हैं,
बिन मांगे ही कीमती तजुर्बे मिल रहे हैं।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-146

16.6.22

S-145 आंधियों, तुम्हें

आंधियों, तुम्हें खुश न होने दूंगा मैं,
लो मैने ख़ुद ही बुझा दिए चराग़ अपने।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-145

15.6.22

P-110 यारब तेरी दुनियाँ

यारब तेरी दुनियाँ में हैं कैसे कैसे लोग,
घुन्ने, नकचढ़े, शातिर, इकलखुरे लोग।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-110

14.6.22

S-144 मैं भी कुछ

मैं भी कुछ खुश नहीं तुमसे दोस्ती करके,
तुमने अच्छा किया जो मुझे दुश्मन बना लिया।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-144

P-109 एक मुसीबत से

एक मुसीबत से बचने के लिए,
हज़ार मुसीबतों के द्वार मत खोल दो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-109

12.6.22

S-323 सारी दुनियाँ

सारी दुनियां उन्हें लगने लगी दुश्मन तो,
हम भी शामिल कर लिए गए कसूरवारों में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-323

Q-071 वो मुहब्बत ही क्या

वो मुहब्बत ही क्या जिसमे थोड़ी सी बेवफ़ाई न हो,

वो इश्क़ ही क्या जिसमे कभी थोड़ी सी जुदाई न हो,

मुहब्बत की पायेदारी कैसे साबित की जाएगी भला,

अगर एक बार उसमें कभी थोड़ी सी रुसवाई न हो। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-071

11.6.22

P-108 यादों का एहसास

यादों का एहसास भी तभी होता है,
जब किसी की यादाश्त कमज़ोर न हो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-108

10.6.22

P-107 जहां में कौनसी

जहां में कौनसी सीमा वो होगी,
सैलाबे-अश्क को रोक जो लेगी।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-107

P-106 कहते हैं प्रेम

कहते हैं प्रेम की कोई सीमा नहीं होती है,
तो नफ़रतों की भी कहाँ सीमा होती है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-106

P-105 माना वो गुस्से में

माना वो गुस्से में सबकुछ तोड़-फोड़ देते हैं, 
पर जाँ से प्यारे हमारे दिल को छोड़ देते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  P-105

P-104 इतने भी कांटे

इतने भी कांटे ना बिछाओ मेरे रास्तों में,
तुम्हे भी चलना पड़ सकता है उन्ही राहों में।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-104

9.6.22

S-143 ख़ुद को बेख़ुद

ख़ुद को बेख़ुद ना इतना बना दो,
कि इश्क़ में इंसाँ को ख़ुदा बना दो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-143

P-103 लोग कहते हैं

लोग कहते हैं, वो मुझे ख़ूब जानते हैं,
मैं कहता हूँ वो ख़ुद को नहीं जानते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-103

Q-070 मेरे हर एक

मेरे हर एक दर्द में वो शामिल है,
इसीलिए तो, वो मेरा साहिल है,
ज़रूरी नहीं कि जाँ निसार दे वो,
उसकी हाज़िरी ही मेरा हासिल है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-070

Q-069 पैंतरा न बदलने

पैंतरा बदलने का हुनर न आया हमे,
हर सूरत हर हाल में हम निभाते रहे।
आख़िर उन्हीं ने किया बदनाम हमे,
रुसवाइयों से जिनको हम बचाते रहे।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-069

8.6.22

P-102 धमकी तो

धमकी तो दुश्मनों से मिली,
सज़ा मगर अपनों से मिली।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" -P-102

7.6.22

M-036 हक़ीक़तों में और

हक़ीक़तों में और जी नहीं सकते,
ख़्वाबों में हमेशा रह नहीं सकते,
धरती छोड़के जाएं तो जाएं कहाँ,
आकाश में बसेरा कर नहीं सकते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-036

6.6.22

S-142 कट गए हैं पंख

कट गए हैं पंख मेरे,  मगर मैं मोहताज नहीं, 
चल तो सकता हूँ, क्या हुआ जो परवाज़ नहीं।

- वीरेंद्र सिन्हा “अजनबी“ S-142

P-101 क्यों कोई

क्यों न कोई हो जाए बेगाना,
ख़ारज़ार जब होगया ये ज़माना।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-101

P-100 जड़ें कितनी

जड़ें कितनी गहरी हैं, पता चल जाएगा,
ज़रा मुझे थोड़ी सी ज़मीन खोदने तो दो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-100

4.6.22

S-141 वो हो गया बेवफ़ा

वो हो गया बेवफ़ा, इसका हमे कुछ गिला नहीं,
दर्द ये है, बेवफ़ा होकर भी उसे कुछ मिला नहीं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-141

S-140 किसी तांत्रिक

किसी तांत्रिक ने आज हमको ये बतलाया है,
हम भूले हैं जिसको, हमपे उसी का साया है।

- वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-140

T-021 बड़े ज़ब्त का

बड़े ज़ब्त का काम है,
लंबी ख़ामोशी से गुज़रना,
फिर लंबे सफ़र से गुज़रना।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-021

3.6.22

Q-068 तुम बस ज़रा

तुम बस ज़रा सा मुस्कुरा दो, 
मैं तुम्हारे दिल की बात समझ लूंगा,
थोड़ा करीब से गुज़र जाओ,
मैं उसको ही मुलाक़ात समझ लूंगा।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-068

M-035 उसे क्या समझेंगे

उसे क्या समझेंगे हम यार,
ख़ुद को ही न समझ पाए,
मिली न इबरत हादसों से,
बार बार ठोकरें  हम खाए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  M-035

M-034 कभी उनकी आंखों

कभी  उनकी आंखों में बसते हैं हम,
कभी उन्हीं आंखों में खटकते हैं हम,
ये कैसा पैमाना हैं उनकी आंखों का,
कभी दोस्त कभी दुश्मन लगते हैं हम।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  M-034

T-020 इंसाँ की तमन्ना

इंसाँ की तमन्ना है,
जब जब उसका मिजाज़ बदले, 
दुनियाँ भी उसीके हिसाब बदले। 

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" T-020

2.6.22

S-139 काश कि

काश कि बेवफ़ा लोग यादें भी साथ ले कर जाया करते,
उनके दिए हुए ज़ख़्म तो कम से कम भर जाया करते।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"  S-139

S-138 मुहब्बत को

मुहब्बत को उतना ही समझा जितना तूने समझाया हमें,
उसके आगे क्या था,  तन्हा होकर  ही समझ में आया हमें।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-138

Q-067 जानते हो दिल

जानते हो दिल समझेगा नहीं,
फिर उसको समझाते क्यों हो।
भूल चुके हो तुम मुझको,
बार बार ये उसे रटवाते क्यों हो।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" Q-067

S-137 ये ख़ुशफ़हमी न

ये ख़ुशफहमी न पाल लेना, तुम्हारी आरज़ू है।
हमे तो महज़ तजुर्बों में इज़ाफ़े की जुस्तजू है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-137

M-033 कोई दुश्मन नहीं

कोई दुश्मन नहीं बनता,
हम दुश्मन बना लेते हैं।
कोई सर पर नहीं चढ़ता,
हम ही उसे चढ़ा लेते हैं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी M-033

P-099 वक़्त बहुत

वक़्त बहुत कीमती हो गया है आज,
लोगों ने देना, और हमने मांगना छोड़ दिया है आज।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-099

1.6.22

P-098 पूरे जब दिल

पूरे जब दिल के सभी अरमाँ हो गए,
वक्ते-आख़िरी में तुम भी मुसलमाँ हो गए।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-098

P-097 जी तो बहुत

जी तो बहुत करता है कि नेक इंसाँ बनूं,
पर  है कौन यहां, जिसके संग एक इंसाँ बनूं।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" P-097

K-007 सूरज को मैं

सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...