हमने भलमनसाहत में जाने क्यों दर्द इतने पाल लिए,
कर सकते थे जिन्हें दरकिनार, उनके नखरे पाल लिए।
कर सकते थे जिन्हें दरकिनार, उनके नखरे पाल लिए।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-156
ग़ज़ल, किता, अशार, कविता, मुक्तक, पंक्तियां, हायकू आदि वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी की रचनाएं
सूरज को मैं समेट लूं, अपने ही आँगन में, चाँद की रौशनी भर लूं अपने ही दामन में। पर्वतों को ध्वस्त कर दूं, जंगल काट डालूँ, मौसम बदल कर 'सू...
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