आपकी लम्बी ख़ामोशी में भी बड़ा दम है,
आपके ज़हन में ज़रूर कोई पेंच या ख़म है,
दिल में आपके मेरी फ़ाइल अब भी है खुली,
इतना होना भी मेरे लिए भला क्या कम है।
आपके ज़हन में ज़रूर कोई पेंच या ख़म है,
दिल में आपके मेरी फ़ाइल अब भी है खुली,
इतना होना भी मेरे लिए भला क्या कम है।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-037
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