28.6.22

M-037 आपकी लम्बी ख़ामोशी

आपकी लम्बी ख़ामोशी में भी बड़ा दम है,
आपके ज़हन में ज़रूर कोई पेंच या ख़म है,
दिल में आपके मेरी फ़ाइल अब भी  है खुली,
इतना होना भी मेरे लिए भला क्या कम है।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" M-037

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