2.6.22

S-138 मुहब्बत को

मुहब्बत को उतना ही समझा जितना तूने समझाया हमें,
उसके आगे क्या था,  तन्हा होकर  ही समझ में आया हमें।

-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी" S-138

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K-007 सूरज को मैं

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